मल्लिका-ए-गजल थीं शांति हीरानंद

Card image admin नई दिल्ली | Published on: Monday, April 13th, 2020
Card image

मल्लिका-ए-गजल थीं शांति हीरानंद

  • पद्मश्री शांति का निधन, संगीतप्रेमियों ने जताया शोक

Anoop Mishra, लखनऊ। शहर के संगीतप्रेमियों ने गजल गायिका पद्मश्री शांति हीरानंद के निधन पर गहरा शोक जताया। 87 वर्षीय शांति हीरानंद का हरियाणा गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल में 10 अप्रैल को सुबह निधन हो गया।  वे काफी समय से गैस्ट्रोएंट्राइटिस से पीड़ित थीं।

भातखंडे विवि की कुलपति प्रो श्रुति सडोलिकर ने कहा कि बेगम अख्तर की प्रिय शिष्या थीं। शांति जी ने गुरु गायकी को आत्मसात किया। उनकी गायकी का अंदाज अलग था। वे बेगम के साथ अक्सर तानपुरे पर संगत करतीं रहीं। छह साल पहले भातखंडे संगीत कार्यशाला में आईं थीं।

– लखनऊ में गायकी चढ़ी परवान

एसएनए के पूर्व संगीत सर्वेक्षक पं रविचंद्र गोस्वामी ने कहा कि हीरानंद ने 1989 में अवध संध्या कार्यक्रम में प्रस्तुति दी थी। उनकी अकेडमी में रेकॉर्डिग आज भी है। वे गजल के अलावा दादरा, ठुमरी के फन में बेजोड़ थीं। मल्लिका-ए-गजल थीं हीरानंद। अफसोस अनदेखी में एसएनए सम्मान आज तक नहीं दिया गया। सनतकदा फेस्टिवल की आयोजिका माधवी कुकरेजा ने कहा कि हीरानंद 1930 के आसपास लखनऊ में रहीं। 1940 में लाहौर रहकर वापस लखनऊ आईं। फिर बेगम अख्तर की बतौर शागिर्द रहीं। सनतकदा फेस्टिवल 2010 में परफॉर्मेंस दी थी। वर्ष 2012 में उन्हीं की प्रेरणा से बेगम अख्तर की मजार का जीर्णोद्धार हुआ। उनकी ख्याति दुनियाभर में थी।
– बोलीं थीं अब शायद न आ पाऊं
वरिष्ठ लेखक सलीम किदवई बताते हैं कि सितंबर 2018 में शांति हीरानंद लखनऊ आईं थीं। हम सब ठाकुरगं के पसंदबाग़ स्थित बेगम अख्तर की मजार पर गए। वे शारीरिक रूप से असमर्थ हो गईं थीं। बोलीं ‘ किसी तरह आ तो गई, लेकिन शायद अब न आना हो ‘। भातखंडे से संगीत की शिक्षा ली थी। अपनी गुरू बेगम अख्तर के साथ निभाया गया उनका साथ, बमुश्किल दिखता है।


अपडेट