लॉकडाउन में किताबों को बता रहे अच्छा साथी, 23 अप्रैल 1995 को सबसे पहले पुस्तक दिवस मना 

Card image admin नई दिल्ली | Published on: Thursday, April 23rd, 2020
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लॉकडाउन में किताबों को बता रहे अच्छा साथी, 23 अप्रैल 1995 को सबसे पहले पुस्तक दिवस मना 

23 April. नई दिल्ली: दुनिया के कई देश कोरोनावायरस महामारी के कारण लॉकडाउन में है. ऐसे में काफी पहले से ही कहा जा रहा है कि इस समय किताबें पढ़ना सबसे अच्छा रहेगा जिससे लोगों की बोरियत भी कम होगी और काफी कुछ नया सीखने को भी मिलेगा.
ऐसी ही बातें विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर फिर से आज होने लगी है और लोग सोशल मीडिया पर किताबें पढ़ने की सलाह दे रहे हैं और पसंदीदा किताबों के बारे में भी पूछ रहे हैं.
23 अप्रैल 1995 को सबसे पहले विश्व पुस्तक दिवस मनाया गया था. तब से हर बरस ये मनाया जा रहा है.
द नोबेल प्राइज कमिटी ने ट्वीट कर रबींद्रनाथ टेगौर को कोट करते हुए कहा, ‘उच्च शिक्षा वो है जो न केवल सूचनाएं देता है बल्कि हमारी जिंदगी को शांतिप्रिय भी बनाता है’.
यूएन के सेक्रेटरी जनरल एंतानियो गुतारेस ने लिखा, ‘मेरी पूरी जिंदगी में किताबें हमेशा से मुझे सहज बनाने का जरिया रही हैं. मुश्किल समय में जैसा कि अभी है, किताबें अकेलेपन की भावना को खत्म कर सकती हैं. विश्व पुस्तक दिवस के दिन आइए पढ़ने की परिवर्तनकारी शक्ति का जश्न मनाएं’.
धर्मगुरु सदगुरु ने लिखा, ‘यदि आप किताब प्रेमी हैं तो लॉकडाउन अच्छा समय है. आप बिना कुर्सी से उठे पूरी दुनिया की सैर कर सकते हैं’.
एक ट्विटर यूज़र जगन पातीमीडी ने एक फोटो शेयर की जो कि जापान की स्टेच्यू है. उसने लिखा, ‘आप कितने किलो के हो आपके वजन को तय नहीं करता बल्कि ये तय करता है कि कितनी किताबें पढ़ी हैं’.
किताबों के प्रकाशक समूह पेंग्विन ने ट्वीट कर लिखा, ‘हम पेंग्विन हैं और पेंग्विन हम सब है. कभी-कभी हमें जो चाहिए होता है वो किताबें होती हैं…और बस किताबें होती हैं…सही है न?’
राजकमल प्रकाशन ने विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर अपने पाठकों से उनकी पांच पसंदीदा किताबों के नाम पूछे हैं.

नेताओं ने भी सबसे अच्छा साथी बताया
छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री टीएस सिंहदेव ने लिखा, ‘अच्छी किताबें व्यक्ति की सबसे अच्छी दोस्त होती है’. इसे याद रखिए और लॉकडाउन का इस्तेमाल किताबों की सोहबत में अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए कीजिए.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर विश्व पुस्तक दिवस की बधाई दी और कहा कि यह मौका है सदियों से लिखी गई कविताओं, फिक्शन, गद्यों का याद करने का. किताबें मानव सभ्यता, संस्कृति को समझने का एक जरिया है. किताबों को अपना साथी बनाएं.
नवीन पटनायक ने ट्वीट कर लिखा, ‘किताबें ज्ञान को बढ़ाता है, दिमाग को विस्तार देता है और हमारी कल्पनाओं को उड़ान देता है और हमारे लोगों और संस्कृति को समझने में मदद करता है. विश्व पुस्तक दिवस के दिन कोरोनावायरस महामारी से हुई आइशोलेसन की भावना को पढ़ने से हराएं’.
सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर नेलिखा, ‘किताबें हमेशा दोस्त होती हैं. किताबें दुनिया की हमारी समझ को बढ़ाने में और जिंदगी को समझने में मदद करती हैं’.
अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने कहा था, ‘किताबों से वफादार कोई भी दोस्त नहीं होता’. (Sabhar: theprint)


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